क्या आपको पता थी दिवाली के बारे में ये बाते अगर नहीं तो अभी जान ले

क्या आपको पता थी दिवाली के बारे में ये बाते अगर नहीं तो अभी जान ले  – दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत में हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल हिन्दू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार मनाया जाता है. इसे अक्टूबर से नवम्बर के बीच मनाया जाता है, और इसकी तारीख वर्षाभर बदलती रहती है। दिवाली का मतलब होता है “दीपों की पंक्ति” या “दीपों का त्योहार,” जिसे विभिन्न प्रकार के दीपकों (दिए) के उपयोग से मनाया जाता है।

दिवाली का महत्व:

  1. प्राचीनतम दिन: दिवाली का त्योहार प्राचीन भारतीय साहित्य में मान्यता प्राप्त है और यह हिन्दू पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महत्वपूर्ण है।
  2. पुरानी धार्मिक कथाएँ: दिवाली के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कथाएँ होती हैं, लेकिन सबका मुख्य सन्देश असत्य पर सत्य की विजय होती है।
  3. प्रकाश का प्रतीक: दीपों के जलाने से, त्योहार का मुख्य माहौल प्रकाशमय होता है, जिससे अंधकार की जीत का प्रतीक माना जाता है।
  4. सामाजिक और पारिवारिक महत्व: दिवाली एक परिवार मिलने और एक साथ यह अच्छा वक्त बिताने का मौका भी प्रदान करता है।
  5. व्यापारिक महत्व: दिवाली एक व्यापारी उत्सव भी होता है, जिसमें व्यापारी वर्ग अपने ब्याज और आर्थिक लेन-देन को सुख-शांति से करता है

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सामान्य रूप से, दिवाली के त्योहार के दौरान लोग अपने घरों को सजाते हैं, दीपक जलाते हैं, पूजा करते हैं, खाने-पीने का आनंद लेते हैं, और अपने प्रियजनों के साथ समय बिताते हैं। दिवाली का मान्यताए भावनात्मक और सामाजिक महत्व होता है और यह हिन्दू संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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दिवाली, जो भारत और नेपाल में मनाया जाने वाला प्रमुख हिन्दू त्योहार है, विभिन्न कारणों से मनाई जाती है। इसे ‘दीपावली’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है ‘दीपों की पंक्ति’।

दिवाली का मुख्य कारण यह है कि यह एक धार्मिक त्योहार है और यह प्रकाश, खुशी, और सौभाग्य की प्रतीकता है। इसे हिन्दू धर्म के अनुसार प्रकाश के जीवन की सीखने और मनाने का अवसर माना जाता है।

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दिवाली के मनाने के पीछे और कई कारण होते हैं, जैसे कि:

  1. भगवान राम की वापसी: दिवाली को भगवान राम की अयोध्या लौटने के दिन के रूप में भी मनाया जाता है, जब वह अपने पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आए थे।
  2. भगवान श्रीकृष्ण के रासलीला: मथुरा नगर में भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर दिवाली के दिन रासलीला का आयोजन किया जाता है।
  3. माता लक्ष्मी का स्वागत: दिवाली के दिन, लोग माता लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए अपने घरों को सजाते हैं और दीपक, दिए, रंगों, और फूलों की सजावट की जाती है

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